बेऊर जेल या साजिश का अड्डा? सलाखों के पीछे बन रहे ठगी से मर्डर तक के प्लान; बिहार पुलिस की नींद उड़ी

 बेऊर

बेऊर जेल की सलाखों में कैद अपराधियों ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। यहां मोबाइल के जरिये ठगी से लेकर हत्या की साजिश तक रच दी जाती है। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आये हैं जिसमें बेऊर जेल में बंद अपराधियों ने खूनी साजिश रच दी। यहां तक कि एमपी में वर्ष 2022 में हुए सोना लूट के मामले में वहां की पुलिस बीते फरवरी माह में बेऊर जेल में बंद एक लुटेरे से पूछताछ करने आयी थी।

सूत्रों की मानें तो जेल के ही कर्मियों ने यहां की सुरक्षा में सेंध लगायी है। यही कारण है कि सलाखों के पीछे कैद अभिषेक अग्रवाल धड़ल्ले से मोबाइल से अफसरों को चूना लगाता रहा और लंबे समय तक उसके कारनामों की भनक किसी को नहीं लगी। उसने इसका फायदा उठाते हुए अफसरों को लाखों रुपये ठगे भी और उसकी कारस्तानी बढ़ती गई।
 
छह सौ के मोबाइल का दाम 35 सौ रुपये सूत्रों की मानें तो जेल के भीतर छह सौ के मोबाइल का दाम 35 सौ रुपये है। जेल में बंद अपराधी व्हाट्सएप कॉल भी करते हैं। हाल ही में अभिषेक अग्रवाल के पास से बरामद हुए मोबाइल से भी व्हाट्सकॉल किया जाता था।

कभी इसी जेल में हुई थी मोबाइल की नीलामी बीते 2012 के आठ दिसंबर को बेऊर जेल के अधिकारियों ने देश में पहली बार मोबाइल की नीलामी करवाकर पूरे देश में इतिहास रचा था। तत्कालीन जेल अधीक्षक शिवेंद्र प्रियदर्शी ने जेल में बंद कैदियों व बंदियों से बरामद हुए मोबाइल की नीलामी करवायी थी। हर रोज बड़े स्तर पर जेल में छापेमारी होती थी जिससे काफी संख्या में मोबाइल बरामद हुए थे। कई बंदियों ने मोबाइल रखना छोड़ दिया था।

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