अफसरों की सुस्त चाल और वित्त विभाग की बेरुखी से मंत्रियों के 1453 आश्वासन अधूरे

भोपाल

चुनावी साल में आचार सहिता लगने से पहले विधानसभा का आखिरी मानसून सत्र अगले माह होने जा रहा है और अब विभागीय अफसरों की सुस्त चाल, वित्त विभाग की बेरुखी के चलते सदन के भीतर मंत्रियों द्वारा दिए गए एक हजार 453 आश्वासन अब तक पूरे नहीं हो पाए है। वहीं 797 के पूरे जवाब विभागों से नहीं मिल पाए है।

विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम चाहते है कि विधानसभा सत्र से पहले मंत्रियों द्वारा सदन के भीतर दिए गए आश्वासन पूरे हो जाएं लेकिन मानसून सत्र शुरु होंने में अब एक पखवाड़ा शेष है और अभी तक हजारों की संख्या में आश्वासन पूरे नहीं हो पाए है।  अभी तक सरकारी महकमों ने संसदीय कार्य विभाग को जुड़े 797 आश्वासनों से जुड़े सवालों के पूरे जवाब नहीं भेजे है। शून्यकाल की 67 सूचनाओं के जवाब भी विभागों ने नहीं दिए है। वहीं लोक लेखा समिति की 95 सिफारिशों पर विभागों ने कोई कार्यवाही नहीं की है।

आश्वासन पूरे करने में नगरीय प्रशासन, गृह और स्कूल शिक्षा विभाग सबसे पीछे
मंत्रियों द्वारा विधानसभा के भीतर विधायकों के सवालों और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर उठाए गए सवालों, ध्यानाकर्षण के दौरान मंत्रियों द्वारा सदन के भीतर उन्हें पूरा करने के लिए आश्वासन दिए जाते है लेकिन  विभागीय अधिकारी इन्हें पूरा करने में पर्याप्त रुचि नहीं लेते जिसके कारण सदन के भीतर मंत्रियों की किरकिरी होती है। नगरीय प्रशासन विभाग मंत्रियों के आश्वासन पूरे करने में सबसे पीछे है। यहां 169 आश्वासन अब तक पूरे नहीं हो पाए है। स्कूल शिक्षा विभाग114 आश्वासनों को पूरा नहीं किया गया है।  गृह विभाग ने 107 आश्वासनों पर कार्यवाही नहीं की है। राजस्व विभाग में 106 आश्वासन पूरे नहीं हो पाए है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 88 आश्वासन पूरे नहीं हुए है।

इन विभागों के सभी आश्वासन पूरे
संसदीय कार्य,आनंद,मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विभाग, लोक सेवा प्रबंधन, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु जनजातीय कल्याण, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन, प्रवासी भारतीय विभाग।

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